यह व्हाट्सएप से कॉपी किया है और इसको हमने अभी प्रयोग नहीं किया है।
*वात से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार* :-
✔आहार चिकित्सा :-
वात से पीड़ित रोगी को अपने भोजन में रेशेदार भोजन (बिना पकाया हुआ भोजन) फल, सलाद तथा पत्तेदार सब्जियों का अधिक प्रयोग करना चाहिए।
मुनक्का, अंजीर, बेर, अदरक, तुलसी, गाजर, सोयाबीन, सौंफ तथा छोटी इलायची का भोजन में अधिक उपयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में लहसुन की 2-4 कलियां खानी चाहिए तथा अपने भोजन में मक्खन का उपयोग करना चाहिए इसके फलस्वरूप वात रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
✔उपवास :-
वात रोग से पीड़ित रोगी को सबसे पहले कुछ दिनों तक सब्जियों या फलों का रस पीकर उपवास रखना चाहिए तथा इसके बाद अन्य चिकित्सा करनी चाहिए।
✔सूर्य चिकित्सा :-
वात के रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग पर प्रतिदिन सुबह के समय में एक हरे रंग का पारदर्शक शीशा लेकर, सूर्य के सामने इस प्रकार से खड़ा होना या बैठना चाहिए कि सूर्य की रोशनी इस पारदर्शक शीशे से होती हुई उसके रोगग्रस्त भाग पर पड़े। इस प्रकार से उपचार करने पर रोगी व्यक्ति को पता चलेगा कि एक हरे रंग का प्रकाश रोग ग्रस्त भाग पर पड़ रहा है। रोगी व्यक्ति को कम से कम प्रतिदिन इस क्रिया को 15 मिनट तक करना चाहिए। जिसके फलस्वरूप उसका रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन इसके साथ-साथ रोगी व्यक्ति को खाने-पीने की चीजों का भी परहेज करना चाहिए।
वात के रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में प्रतिदिन नंगे बदन धूप में अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
✔जल चिकित्सा :-
वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करना चाहिए ताकि उसके पेट की गंदगी बाहर निकल सके।
वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कटिस्नान, मेहनस्नान, पादस्नान, उदरस्नान तथा सिर स्नान आदि करना चाहिए।
✔षटकर्म :-
वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कुन्जल, वस्त्रधौती (दूध में कपड़े को भिगोंकर शरीर पर लपेटना), शंख-प्रक्षालन आदि करना चाहिए।
✔योगासन :-
जिस व्यक्ति को वात रोग हो उसे प्रतिदिन इनमें से कोई भी एक या दो आसन करने से उसका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है जैसे- हलासन, भुजंगासन, पश्चिमोत्तासन, धनुरासन, वज्रासन, मयूरासन, मण्डुकासन, सुप्तपंवनमुक्तासन, कुर्मासन, सुप्तावज्रासन, उत्तानमण्डुकासन, अत्तानकूर्मासन, जानुशीर्षाशासन, पादहस्तासन तथा चक्रासन आदि।
✔प्राणायाम :-
वात रोगी को प्रतिदिन भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए। इसके फलस्वरूप उसका वात रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
✔मुद्रा :-
वात से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन महामुद्रा, विपरीतकरणी, उडि्डयान बंध आदि करने से बहुत आराम मिलता है।
No comments:
Post a Comment