Sunday, 31 December 2017

घी के लाभ।। घी से उपचार



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घी खाइए, सेहत का खजाना पाइए :

(1) तेल बार-बार गर्म करने से खराब होते है और ट्रांस फैट में बदलते है यही ट्रांस फैट शरीर में जमता है और बीमारियों का कारण बनता है। परंतु इसके विपरीत घी को उबाल कर ही शुद्ध किया जाता है। सबसे ज्यादा स्मोक पॉइंट होने के कारण घी अधिक तापमान को भी सहन करने की क्षमता रखता है।

(2) घी न केवल हमारे भोजन के स्वाद को बढ़ाता है बल्कि भोजन में घी होने से, कम मात्रा में भोजन करने पर ही भूख शांत होने लगती है। इस प्रकार हम अधिक मात्रा में खाने से बचते हैं।

(3) घी हमारे आमाशय की जठराग्नि को उसी प्रकार प्रचंड करता है जिस प्रकार यज्ञ की अग्नि को। अतः घी न केवल स्वयं शीघ्रता से पचता है बल्कि भोजन के अन्य अवयवों को भी पचाता है।

(4) घी में विटामिन ए, डी, इ, के एवं बी12 प्रचुर मात्रा में होते हैं। इनमें से विटामिन A व D एंटीआक्सीडेंट होते हैं । अतः घी स्वयं एक एंटीआक्सीडेंट की तरह काम करता है और हमारे शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाता है। घी हमारे जोड़ों को मजबूती देता है।

(5) घी हमारे शरीर में 'गुड गट बैक्टीरिया' को बढ़ाता है जो कि भोजन के पाचन एवं अवशोषण के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। घी में मौजूद फैट को प्रीबायोटिक का दर्जा दिया गया है I इस प्रकार भोजन में घी का होना अपच, कब्जी, पेट के फुलाव आदि का स्वाभाविक इलाज है ।

(6) इसी प्रीबायोटिक गुण के कारण घी सबसे अच्छा anti allergen भी है क्योंकि तरह-तरह की फूड एलर्जी का कारण आंतों के बैक्टीरिया का कम होना है ।

(7) कच्चे दूध से निकाले गए सफेद मक्खन में wulzen factor मौजूद होता है जो जोड़ों की सामान्य बीमारियों में एवं गठिया में लाभकारी होता है। wulzen factor को anti stiffness factor एवं anti arthritic nutrient भी कहते है।

(8) घी में मौजूद तत्व कंजुगेटेड लिनोलिक एसिड (CLA) शरीर की चर्बी को गलाने में सहायक होता है। अतः जिस प्रकार लोहा लोहे को पिघला देता है उसी प्रकार शरीर की चर्बी को गलाने के लिए हमें गुड फैट की आवश्यकता होती है l

(9) घी में मौजूद फैटी एसिडस् झुर्रियों रहित, दमकती त्वचा प्रदान करते है। बालों में मजबूती एवं चमक देते हैं।

(10) भोजन में घी की कमी होने से ही भोजन के उपरांत मीठा खाने की इच्छा बनी रहती है।

(11) घी भोजन की ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) को कम करता है अर्थात घी के प्रयोग से, लिए गए भोजन की ग्लूकोस, खून में धीरे धीरे पहुंचती है। ऐसा डायबिटीज एवं दिल की बीमारियों के मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। यही कारण है कि पुराने जमाने से ही खिचड़ी, दाल चावल एवं अन्य कई व्यंजनों में ऊपर से घी डालकर खाया जाता है। खून में ग्लूकोज धीरे-धीरे रिलीज होने से शरीर एवं दिमाग में ग्लूकोस का सतत् लेवल बना रहता है।

(12) घी में मौजूद फैट आसानी से दिमाग में पहुंचते हैं और सोचने समझने की शक्ति को विकसित करने में लाभदायक होते हैं।

(13) 2015 में  US FDA ने स्वीकार किया कि भोजन में कोलेस्ट्रॉल लेने और दिल की बीमारियों में कोई संबंध नहीं है एवं कोलेस्ट्रॉल युक्त भोजन को ना लेने का कोई कारण नहीं है। परंतु 30- 40 साल तक जो गलत धारणा बनी हुई थी उसके चलते हमने ना केवल घी बल्कि मूंगफली, काजू, नारियल जैसी बेहद लाभदायक चीजों को भी खाना छोड़ दिया था। और तो और दूध भी लो फैट ही लाने लगे।

(14) जून 2014 में UK FOOD GUIDELINES (NICE) ने माना कि भोजन में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स लेने की आवश्यकता कतई नहीं है। क्योंकि यदि ओमेगा 3 एवं ओमेगा 6 फैटी एसिड्स को भोजन में ज्यादा लिया जाता है तो यह शरीर में ट्रांस फैट में बदल जाते हैं और अंगों को क्षति पहुंचाते हैं।

(15) चाहे हम घी खाएं या तेल सभी में समान कैलोरी होती है । सभी फैट के 1 ग्राम से 9 किलो कैलोरी मिलती है।

(16) घी के प्रति हमारे मन में यह डर फ़ूड इंडस्ट्री की काली करतूतों की वजह से ही पनपा है क्योंकि यदि घी एवं अन्य पारंपरिक कच्ची घानी के तेलों को को बदनाम न किया जाता तो फ़ूड इंडस्ट्री सफोला, फार्च्यून रिफाइंड, एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल जैसे तेलों को, दिल के लिए लाभकारी बताकर घर-घर ना पहुंचा पाती।

(17) इसलिए सभी व्यक्तियो को चाहे वे अपच, मोटापा, शुगर, BP या दिल की बीमारी से ही ग्रसित क्यों ना हो, भोजन में शुद्ध घी का प्रयोग भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

यदि अभी भी आप घी के प्रति असमंजस में हैं तो दिमाग की सोचने समझने की शक्ति को विकसित करने के लिए घी खाइए ।

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मधुमेह(sugar)* के *रोगी ध्यान*दे*


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       *मधुमेह(sugar)*
              के
        *रोगी ध्यान*दे*
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🌺शुगर जेसे हठीले रोग को लाइलाज माना जाता है,डायबिटीज अब उम्र देश व् परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चूका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता ग्राफ चिंता का विषय है। हमने अथक मेहनत से इसको मेंटेन करने के लिए परम्परागत आयुर्वेद के साथ आधुनिक रीसर्च के सहारे घंसत्व का उपयोग करके इस दवा को बेहद ही लाभकारी बनाया है।  आम लोगों की सेवार्थ यह नुस्खा यहाँ बता रहा हूँ, आजमाकर देखे।
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इसमे कुटकी,चिरायता,आम की गुठली,जामुन,अलोयविरा,सदाबहार,नीम, करेला,मेथी,अश्वगंधा,शुद्ध कुचला,इत्यादि कीमती जड़ीबूटियों के साथ बसन्त कुसुमाकर रस (स्वर्णयुक्त)का मिश्रण किया गया हैं। जो शारीरिक और मानसिक कमजोरी को दूर कर शरीर को नई ताकत देता है।
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✅इस दवा के नियमित सेवन से इन्सुलिन के इंजेक्सन छूट जाते हैं, और रोगी अपनी सामान्य जिंदगी आराम से जी सकता है।
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 *कृप्या ध्यान दे :----*

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➡य दवा शुगर को प्राकृतिक रूप से मेंटेन करती हैं, हम पैंक्रिओस को ठीक करने का दावा नही करते है, क्योंकि जो शारीरिक अंग ख़राब हो गया उसे ये दवा ठीक नही करती है।
ये पूर्णरूपेण शुगर को मेंटेन रखती है तथा शुगर से आई कमजोरी को मिटाती है
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मधुमेह के रोगी मीठे का परहेज करे और आवश्यकतानुसार निम्न का प्रयोग करें---------

1--नीबू: मधुमेह के मरीज को प्यास अधिक लगती है। अतः बार-बार प्यास लगने की अवस्था में नीबू निचोड़कर पीने से प्यास की अधिकता शांत होती है❗

2--खीरा: मधुमेह के मरीजों को भूख से थोड़ा कम तथा हल्का भोजन लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में बार-बार भूख महसूस होती है। इस स्थिति में खीरा खाकर भूख मिटाना चाहिए❗

3--गाजर-पालक : इन रोगियों को गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है❗

3--शलजम : मधुमेह के रोगी को तरोई, लौकी, परवल, पालक, पपीता आदि का प्रयोग ज्यादा करना चाहिए। शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। अतः शलजम की सब्जी, पराठे, सलाद आदि चीजें स्वाद बदल-बदलकर ले सकते हैं❗

4--जामुन : मधुमेह के उपचार में जामुन एक पारंपरिक औषधि है। जामुन को मधुमेह के रोगी का ही फल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी, क्योंकि इसकी गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। मौसम के अनुरूप जामुन का सेवन औषधि के रूप में खूब करना चाहिए❗

5--महीने में 5--6 बार करेले की सब्जी बनाकर खानी चाहिए❗
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*पैरालिसिस (लकवे की* *बीमारी)*



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*पैरालिसिस (लकवे की* *बीमारी)*
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 *बालाजी का लकविना किट*

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✍पैरालिसिस यानि कि लकवे की बीमारी आजकल काफी सुनने को मिलती है। किसी की पूरी बॉडी पैरालिसिस का शिकार हो जाती है तो किसी की आधी बॉडी इस बीमारी के चपेट में आ जाती है। कुछ लोगों के शरीर के किसी विशेष अंग को भी पैरालिसिस हो जाता है
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✍दरअसल मस्तिष्क की धमनी में किसी रुकावट के कारण उसके जिस भाग को खून नहीं मिल पाता है, मस्तिष्क का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है। अब यह तो सभी जानते हैं कि हमारे मस्तिष्क की इंद्रियां हमारे शरीर के हर अंग को संचालित करती हैं। वे विविध अंगों से जुड़ी होती हैं, उन्हें कंट्रोल करती हैं।
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✍ यदि दिमाग का कोई भाग प्रभावित हो जाए, तो वह भाग शरीर के जिन अंगों से जुड़ा होता है, उन्हें काम करने के लिए अपना आदेश नहीं भेज पाता है। इसी कारण से वे अंग हिलडुल नहीं सकते, जिस कारण जन्म लेती है लकवे की बीमारी

✍आपको बता दें कि हमारे मस्तिष्क का बायां भाग शरीर के दाएं अंगों पर तथा मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं अंगों पर नियंत्रण रखता है। मस्तिष्क के अलावा यदि व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में कोई दिक्कत आए, तब भी पैरालिसिस का खतरा बना रहता है। क्योंकि इसी रीढ़ की हड्डी की इंद्रियां मस्तिष्क तक जाती हैं। विज्ञान की भाषा में रीढ़ की हड्डी में छोटा दिमाग होने का भी दावा किया जाता है।
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✍लकवे के रोग का कारण तो साफ है, लेकिन इसके कई प्रकार भी होते हैं। विशेष तौर पर डॉक्टरों ने लकवे के रोग के 9 प्रकार देखे हैं।
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एनर्जी पॉवर बूस्ट



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🌹*सेहत *का* खजाना*🌹
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          एनर्जी पॉवर बूस्ट

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अब दुबले पतले व्यक्तियों के लिए एक बेहद शानदार नुस्खा लेकर आए हैं, (एनर्जी पॉवर बूस्ट) जी हां इसमें भूख बढ़ाने वाली अनेकों जड़ी बूटियो का मिश्रण है, साथ ही मांस को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता हैं।
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अस्वगंधा,शतावरी,सफेद मूसली,अर्जुन छाल, उरद, ग्वारपाठा,अजवायन,मैथी, त्रिकटु,त्रिफला इत्यादि बहुमूल्य जड़ी बूटी जो भूख बढ़ाने के साथ साथ शारीरिक विकास करती हैं।
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शरीर को विटामिन, प्रोटीन,कार्बोहैड्रेट्स,  मिनरल,बैलेंस डाइट से मिलते हैं, कभी कभी बैलेंस डाइट लेते हुये भी शरीर का विकास रुक जाता है, एनर्जी पॉवर बूस्ट इस रुके हुऐ शारीरिक विकास को पुनः स्थापित करता है भूख प्राकृतिक रूप से ही लगती है और किसी प्रकार का साइड इफ़ेक्ट नही होता।
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ऐसे व्यक्ति जो शारीरिक विकास ना होने की वजह से हीनभावना ग्रस्त हो गए या फिर फ़ौज पुलिस की भर्ती की तैयारी करते हैं और अंडर वेट की समस्या से ग्रसित हैं इसे आजमाए और रुके हुये शारीरिक विकास से निजात पाये।
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बॉडी बनाने के लिए जिम में जाने वाले व्यक्तियों को अतिरिक्त एनर्जी की जरूरत होती है, इस पॉवर बूस्ट से खाया पीया तुरन्त हजम हो जाता हैऔर शरीर को अतिरिक्त एनर्जी मिलती है।
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☘ मनोरोग का प्रकोप☘




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🌹🌹हिस्टीरिया🌹🌹

  ☘ मनोरोग का प्रकोप☘

👉सर्वप्रथम एरंड तेल में भुनी हुई छोटी काली हरड़ का चूर्ण ५ ग्राम प्रतिदिन लगातार दे कर उसका उदर शोधन तथा वायु का शमन करें।
सरसों, हींग, बालवच, करजबीज, देवदाख मंजीज, त्रिफला, श्वेत अपराजिता मालकंगुनी, दालचीनी, त्रिकटु, प्रियंगु शिरीष के बीज, हल्दी और दारु हल्दी को बराबर-बराबर ले कर, गाय या बकरी के मूत्र में पीस कर, गोलियां बना कर, छाया में सुखा लें। इसका उपयोग पीने, खाने, या लेप में किया जाता है। इसके सेवन से हिस्टीरिया रोग शांत होता है।
लहसुन को छील कर, चार गुना पानी और चार गुना दूध में मिला कर, धीमी आग पर पकाएं। आधा दूध रह जाने पर छान कर रोगी को थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें।

💯✅ब्रह्मी, जटामांसी शंखपुष्पी, असगंध और बच को समान मात्रा में पीस कर, चूर्ण बना कर, एक छोटा चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें। इसके साथ ही सारिस्वतारिष्ट दो चम्मच, दिन में दो बार, पानी मिला कर सेवन करें।
ब्राह्मी वटी और अमर सुंदरी वटी की एक-एक गोली मिला कर सुबह तथा रात में सोते समय दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।
जो रोगी बालवच चूर्ण को शहद मिला कर लगातार सवा माह तक खाएं और भोजन में केवल दूध एवं शाश का सेवन करे, उसका हिस्टीरिया शांत हो जाता है।
अगर रोगी कुंवारी लड़की है, तो उसकी जल्द शादी करवा देनी चाहिए। रोग अपने आप दूर हो जाएगा।   
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निरोगी रहने के 9 स्टेप्स।*



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निरोगी रहने के 9 स्टेप्स।*
 😊💪🏻🥝
★ताली बजाओ,रोग भगाओ                              ★तलवा घिसिये,चेहरा चमकाइये                   
★हथेली मलिए,ऊर्जा जगाइए                               ★नाख़ून रगड़िये,बुढ़ापा झड़किये।                             ★खुलकर हंसिए,सुस्ती भगाइए।                              ★रोज सुबह टहलिए,पूरा दिन चार्ज रहिए ।।         
★दस मिनिट दौड़िये,बीमारी का मुँह मोड़िये ।     
★रोज कीजिये डांस,रोगों को नही मिलेंगा चांस         
★सुनिए संगीत मन होगा पुलकित                          
*😊सदा मुस्कुराते रहो😊*
💪🏻🥝🤝🏻


चाय पियें













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दूध वाली चाय से फायदेमंद है यह ड्रिंक, सिर्फ 2 STEPS में होगा तैयार

25/12/17 #DEVDHALLIWAL

आमतौर पर लोग सुबह उठकर दूध वाली चाय पीते हैं। जबकि दूध वाली चाय के बजाय अगर लौंग वाली चाय पिएं तो हेल्थ को ज्यादा फायदा होता. जानिए लौंग वाली चाय बनाने की प्रॉसेस, साथ ही इसे पीने से होने वाले 7 फायदे.

लौंग की चाय बनाने का तरीका – एक कप पानी में 2 लौंग और चायपत्ती डालकर इसे उबाल लें. अच्छी तरह उबल जाने पर इसे छान लें, और पीयें.

इसमें पोटेशियम होता है यह हार्ट की बिमारियों से बचाती है.

इसमें कार्बोहाईड्रेट्स होते हैं. इससे एनर्जी मिलती है. कमजोरी दूर होती है.

इसमें फिबेर्स होते है. इससे डाईजेशन ठीक रहता है. कब्ज जैसी पेट की प्रॉब्लम दूर होती है.

इसमें विटामिन ई होता है. इससे स्किन और बालों की चमक बढती है.

इसमें एंटी इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती है. यह जोड़ों के दर्द से बचाती है.

लौंग की चाय में मेगनीशियम होता है इससे बॉडी की इमुनिटी बदती है. सर्दी-खांसी से राहत मिलती है.

इसमें एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती है. यह दांत और गम की प्रॉब्लम से बचाती है.

लौंग की चाय पीते समय किन बातों का रखें ध्यान?

इस चाय की तासीर गर्म होती है। एक दिन में दो कप से ज्यादा चाय न पिएं। इससे लंग्स और आंतों को नुकसान हो सकता है. कुछ लोगों को लौंग से एलर्जी होती है। इसलिए प्रेग्नेंसी में लौंग की चाय अवॉयड करें. ब्रेस्टफीडिंग मदर लौंग की चाय पीने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।




☘ *"कौन कहता है आयुर्वेद देर से लाभ करता है,एक नुस्खा आजमाँ कर देखों तो यारों* 🍀
शीत काल का प्रारंभ हो चुका है यदि आप चाहते हैं कि आप सर्दी,जुकाम,खांसी,दमा न हो तो बस आप के लिए नुस्खा तैयार है 3-4 चाय पियें और स्वस्थ बने रहें---
😊 कालीमिर्च 5-6
😊 लौंग 2
😊 इलाइची 2
😊 दालचीनी थोड़ी सी
😊 जावित्री।  थोड़ी सी
😊 अदरक।  1 इंच
😊 तुलसी पत्ती 8
😊 जवारंकुश पत्ती 1
🍀 जावित्री तक सामग्री कूट कर पानी में काढ़ा बनाये खूब उबल जाने के बाद तब अदरक डाल कर उबालें फिर अंत में तुलसी और जवारंकुश की पत्ती डाल कर उबाल कर छान कर नींबू का रस डाल कर पियें --जल्दी हो तो सब एक साथ उबाल कर पियें (दूध नहीं डालना है) बहता हुआ सर्दी जुकाम में तुरंत आराम हो जायेगा स्वास कास दमाँ  पास नहीं फटकेगा।
*सभी को बताएं सभी स्वास्थ लाभ उठायें*

खुजली




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🔅 *खुजली का काल है नारीयल आैर कपूर तैलका मिश्रण*🔅
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*संजीवनी हैल्थकैयर* द्वारा जनहित मे जारी यह मेसेज सभी लोगो तक पहोंचाकर *रोगमुक्ति अभियान* मे सहयोग दे | 

दोस्तो नमस्कार इन दिनो चर्म रोग ने लोगो को काफी परेशान कर रखा हा तरह तरह के चर्मरोगो से लोग परेशान हो चूके है | *लोग तरहां तरहा की दवाइयां प्रयोग कर रहे है लेकीन अंतमे होता है सिर्फ पैसो की बर्बादी* | आज आपको नारीयल का तैल आैर कपूर का तैल का मिश्रण जो बताने जा रहे है उससे आपके  जरुर फायदां होगा | यह तैल आपको चर्मरोग जैसे की *दाद, खाज, खुजली, सोरायसीस, फन्गल इन्फेक्शन,लाल चकामे आैर कीसी भी प्रकार के चर्म रोग* को दूर करने मे काफी कारगर सीद्ध होगा | 

🔅 *चर्मरोगनाशक नारीयल आैर कपूर का तैल बनाने की रीत*🔅

*नारीयल का तैल 200 Ml शुद्ध लिजिये आैर कपूर 5 ग्राम लिजिये* | दोनो को मिक्स करके कीसी लोहे के पाञ मे रखकर गरम करते जाये | तब तक उबाले जब तक की कपुर नारीयल के तैल के साथ मिक्स ना हो जाये | फीर उसको *ठंडा होने पर प्रयोग मे लिजिये* |

अगर आपको चर्म रोग है तो *चर्म रोग वं खूजली के उपर यह तैल दिनमे २-३ बार लगा सकते है* | यह नियमित रुपसे इसका प्रयोग विश्वास आैर श्रद्धा से करीये आपको फायदां जरुर होगा आैर खूजली तो मिनिटोमे दूर होगी | *अगर आपको फायदां होता है तो आप यह मेसेज १० लोगो के साथ शेयर करीये* ताकी सभी लोग चर्मरोग से मुक्त हो सके |


*पेट दर्द के लिए घरेलू उपाय*❄


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❄ *पेट दर्द के लिए घरेलू उपाय*❄
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*सर्दी के दिनों में ठंड़ लगने के कारण पेट की गड़बड़ी होना आम बात है। खान-पान में आए बदलाव की वजह से प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। जिससे शरीर छोटी-मोटी बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाता है और पाचन क्रिया में भी गड़बड़ी पैदा होने लगती है। इस कारण पेट में दर्द होने लगती है। अचानक उठने वाले इस दर्द को ठीक करने के लिए कई बार हम समझ नहीं पाते कि कौन-सा नुस्खा अपनाएं, जिससे यह परेशानी जल्दी से दूर हो जाए। इस तरह की दिक्कतों को दूर करने के लिए कुछ घरेलू तरीके आपके काम आ सकते हैं-*

*🌈काली मिर्च*
काली मिर्च सेहत के लिए फायदेमंद है। काली मिर्च के पाउडर में हींग,सौंठ और काला नमक डालकर चूर्ण बना लें। पेट से संबंधित परेशानी के लिए गुनगुने पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन करें। 
*🌈नमक और पानी*
पेट दर्द का कारण पेट की गैस भी हो सकता है। कुछ भी खाने के बाद खाना पचाने में परेशानी हो रही है तो एक कम गर्म पानी में एक छोटा चम्मच नमक मिक्स करके पी लें। 
*🌈इलायची*
इलायची पाचन क्रिया को दुरूस्त रखने का काम करती है। खाना खाने के बाद 2 इलायची को पीसकर शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। दर्द से छुटकारा मिलेगा। 

*🌈एलोवेरा जूस*
एलोवेरा का रस पेट से जुड़ी परेशानियों को दूर करने का काम करता है। इसका सेवन करने से आंते साफ हो जाती है। रोजाना सुबह खाली पेट एेलोवीरा का जूस पानी में मिक्स करके पीएं। 

*🌈अनारदाना*
पेट में गैस बनने की परेशानी है तो अनारदाने में काली मिर्च और नमक डालकर खाएं। इससे दर्द और गैस से राहत मिलेगी। 
🌹🌹सर्दियों में स्वस्थ रखे आयुर्वेद🌷🌷
        🌹जय श्री राम🌹
🌳प्रायः शरद के प्रारंभ में पित्त प्रकुपित हो जाया करता है। अतः सौम्य एवं पित्त शामक विरेचन द्वारा बड़े दोषों को शांत कर देना चाहिए। समान भाग में निशोध, धमासा, नागरमोथा, श्वेत चंदन और मुलेठी को कूट-पीसकर मनुक्का में मिलाकर गोलियाँ बना लें। दो गोली रात को सोते समय लेने से शरीर में हल्कापन महसूस होता है। इस औषधि से ब़ूढे, बच्चे सभी अपना पेट साफ कर सकते हैं।
        ♦♦☘☘♦♦♦
✅💯आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में बिस्तर छोड़कर उषापान करना चाहिए। महर्षि वाग्भट्ट के अनुसार शरद में जल अमृत के समान हो जाता है। मल-मूत्र परित्याग आदि आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर व्यायाम करना चाहिए। प्रातःकाल का भ्रमण स्वास्थ्यवर्द्धक है। व्यायाम के पश्चात तेल मालिश करना चाहिए। जाड़े में नहाने के लिए गरम जल का उपयोग करना चाहिए।

✅💯आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों का वाष्प स्नान बहुत फायदेमंद रहता है। जो हमेशा ठंडे पानी का उपयोग नहाने में करते हैं, उन्हें ठंडे पानी से ही नहाना चाहिए।

✅💯जाड़ों में रात बड़ी होने से सुबह जल्दी ही भूख लग जाती है। सुबह का नाश्ता तंदुरुस्ती के लिए ज्यादा फायदेमंद है। नाश्ते में हलुआ, शुद्ध घी से बनी जलेबी, लड्‍डू, सूखे मेवे, दूध आदि पौष्टिक एवं गरिष्ठ पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

✅💯शकर की अपेक्षा गुड़ सर्दी में अधिक गुणकारी होता है। शहद का उपयोग भी स्वास्थ्यवर्द्धक रहता है। जाड़े में ऊष्णता के लिए शुद्ध घी का सेवन करना चाहिए। मूँग, तुवर, उड़द की दालों का उपयोग अच्छा रहता है। दाल छिलके वाली एवं बिना पॉलिश की होना चाहिए।

✅💯अचार पाचनकर्ता है, लेकिन अधिक खाने से यह नुकसान करता है। बीमारी में केवल नींबू का अचार रोग के अनुसार दिया जा सकता है।

✅💯सूखे मेवे का सेवन भी लाभदायक रहता है। इन्हें उबालना नहीं चाहिए। मेवों की मिठाई गरिष्ठ एवं हानिकारक होती है, जबकि सभी मेवे स्वादिष्ट रुचिकर, तृप्तिकर होते हैं। सर्दी में बादाम, पिस्ता, काजू, छुआरे, पिंड खजूर, अंजीर, केसर का उपयोग करना चाहिए।

☘शरद में जुकाम और इन्फलूएंजा की शिकायत हो जाया करती है। ऐसी हालत में दालचीनी का तेल मिश्री के साथ थोड़ा खाने से तथा रुमाल पर कुछ बूँदें छिड़ककर सूँघने से लाभ मिलता है। नए जुकाम में दाल चीनी की छाल का चूर्ण डेढ़ माशा को गरम चाय से लेने से विशेष लाभ होता है।




🌹🌹सर्दियों में स्वस्थ रखे आयुर्वेद🌷🌷
        🌹जय श्री राम🌹
🌳प्रायः शरद के प्रारंभ में पित्त प्रकुपित हो जाया करता है। अतः सौम्य एवं पित्त शामक विरेचन द्वारा बड़े दोषों को शांत कर देना चाहिए। समान भाग में निशोध, धमासा, नागरमोथा, श्वेत चंदन और मुलेठी को कूट-पीसकर मनुक्का में मिलाकर गोलियाँ बना लें। दो गोली रात को सोते समय लेने से शरीर में हल्कापन महसूस होता है। इस औषधि से ब़ूढे, बच्चे सभी अपना पेट साफ कर सकते हैं।
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✅💯आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में बिस्तर छोड़कर उषापान करना चाहिए। महर्षि वाग्भट्ट के अनुसार शरद में जल अमृत के समान हो जाता है। मल-मूत्र परित्याग आदि आवश्यक कार्यों से निवृत्त होकर व्यायाम करना चाहिए। प्रातःकाल का भ्रमण स्वास्थ्यवर्द्धक है। व्यायाम के पश्चात तेल मालिश करना चाहिए। जाड़े में नहाने के लिए गरम जल का उपयोग करना चाहिए।

✅💯आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों का वाष्प स्नान बहुत फायदेमंद रहता है। जो हमेशा ठंडे पानी का उपयोग नहाने में करते हैं, उन्हें ठंडे पानी से ही नहाना चाहिए।

✅💯जाड़ों में रात बड़ी होने से सुबह जल्दी ही भूख लग जाती है। सुबह का नाश्ता तंदुरुस्ती के लिए ज्यादा फायदेमंद है। नाश्ते में हलुआ, शुद्ध घी से बनी जलेबी, लड्‍डू, सूखे मेवे, दूध आदि पौष्टिक एवं गरिष्ठ पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

✅💯शकर की अपेक्षा गुड़ सर्दी में अधिक गुणकारी होता है। शहद का उपयोग भी स्वास्थ्यवर्द्धक रहता है। जाड़े में ऊष्णता के लिए शुद्ध घी का सेवन करना चाहिए। मूँग, तुवर, उड़द की दालों का उपयोग अच्छा रहता है। दाल छिलके वाली एवं बिना पॉलिश की होना चाहिए।

✅💯अचार पाचनकर्ता है, लेकिन अधिक खाने से यह नुकसान करता है। बीमारी में केवल नींबू का अचार रोग के अनुसार दिया जा सकता है।

✅💯सूखे मेवे का सेवन भी लाभदायक रहता है। इन्हें उबालना नहीं चाहिए। मेवों की मिठाई गरिष्ठ एवं हानिकारक होती है, जबकि सभी मेवे स्वादिष्ट रुचिकर, तृप्तिकर होते हैं। सर्दी में बादाम, पिस्ता, काजू, छुआरे, पिंड खजूर, अंजीर, केसर का उपयोग करना चाहिए।

☘शरद में जुकाम और इन्फलूएंजा की शिकायत हो जाया करती है। ऐसी हालत में दालचीनी का तेल मिश्री के साथ थोड़ा खाने से तथा रुमाल पर कुछ बूँदें छिड़ककर सूँघने से लाभ मिलता है। नए जुकाम में दाल चीनी की छाल का चूर्ण डेढ़ माशा को गरम चाय से लेने से विशेष लाभ होता है।

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